सदन में 'छत्तीसगढ़ी' की गूंज

प्रदेश में बोली जाने वाली छत्तीसगढ़ी को संविधान के अनुच्छेद 347 के तहत राज्य की सरकारी भाषा के रूप में मान्यता दिए जाने संबंधी अशासकीय संकल्प को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया । सदन में छत्तीसगढ़ी के इस्तेमाल को लेकर लंबी बहस भी हुई, लेकिन आसंदी ने नियम-प्रक्रिया व परंपराओं का हवाला देते हुए इसकी अनुमति नही दी । इसके बावजूद छत्तीसगढ़ी बोली की गूंज सुनाई दी ।
कांग्रेस सदस्य श्री भूपेश बघेल संकल्प प्रस्तुत करते हुए छत्तीसगढ़ी बोली में भाषण की शुरूआत की और छत्तीसगढ़ी में बोलने की अनुमति माँगी थी। श्री बघेल ने कहा कि राज्य गठन के सात साल बाद भी भाषा नहीं मिल पाई है।
सभी राज्यों की अपनी भाषा है, तो छत्तीसगढ़ी भाषा क्यों नहीं ? हम इसे कब सम्मान देंगे, यह हमारी भावनात्मक लड़ाई है । छत्तीसगढ़ी में शब्दकोश है और व्याकरण भी सुरक्षित है । प्रदेश के दो करोड़ लोगों की यह भाषा है । संविधान के अनुच्छेद 347 के तहत भाषा का दर्जा दिया जा सकता है । सदस्य श्री रविंद्र चौबे ने भी छत्तीसगढ़ी में भाषण देने के लिए आसंदी से अनुमति चाही, पर उन्हें भी अनुमति नहीं मिली, इससे नाराज होकर उन्होने सदन का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी, मगर श्री बघेल ने उन्हें रोकते हुए छत्तीसगढ़ी में ही भाषण जारी रखने की बात कही।
नेता प्रतिपक्ष श्री महेन्द्र कर्मा ने कहा कि संसद में क्षेत्रीय भाषाओं के लिए ट्रांसलेशन का प्रावधान है, इसलिए यहाँ भी छत्तीसगढ़ी में बोलने की इजाजत दी जानी चाहिए। उन्होंने आसंदी से ट्रांसलेट की व्यवस्था करने का आग्रह किया। अध्यक्ष श्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं के लिए संसद में नियम बने हुए है, लेकिन यहाँ ऐसी व्यवस्था नहीं है ।
हिंदी राज्य भाषा घोषित है, जिससे सारे कामकाज होते हैं । छत्तीसगढ़ी को जब तक राजभाषा का दर्जा नहीं मिल जाए, सदन में उल्लेख नहीं कर सकते । श्री चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा हमारी अस्मिता की पहचान है । इसे राजभाषा का दर्जाओ मिलने से संप्रेषण का माध्यम बनेगा।
संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी छत्तीसगढ़ी में ही भाषण की शुरूआत की और संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी को भाषा का दर्जा मिले, यह प्रदेश की जनता की भावना है। छत्तीसगढ़ी समता, ममता व आम लोगों की संपर्क भाषा है । इसका इतिहास भी बहुत पुराना है। छत्तीसगढी में साहित्य विद्यमान है।

पंडवानी गायिका पद्यविभूषण श्रीमती तीजनबाई और प्रसिध्द पंथी नर्तक श्री देवदास बंजारे ने इसे देश-विदेश में सम्मान दिलाया है। हम केंद्र सरकार से माँग करते हैं कि छत्तीसगढी को भाषा का दर्जा दिया जाए। चर्चा में भाजपा के श्री कोमल जंघेल व कांग्रेस के डॉ. हरिदास भारद्वाज ने भी भाग लिया।

Comments

Post new comment

  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Lines and paragraphs break automatically.
  • Images can be added to this post.
  • You may use [inline:xx] tags to display uploaded files or images inline.

More information about formatting options