राज भासा छत्तीसगढ़ी : हमर सपना - रामनाथ साहू

हमन सबले पहिली भारतीय होय के बाद छत्तीसगढ़िया अन । ये सोच ल हिरदे मा संजोय के बाद जब अपन छत्तीसगढ़िया चिन्हारी कोती धियान करथन तब अब्बड़ अकन निरासा हाथ लगथे । एक पईत दिल्ली प्रेस के सरिता-मुक्तामन राष्ट्रभासा हिन्दी के समर्थन मा अपन मा बाक्स छापे जेमे लिखाय रहे कि हिन्दी जाहिलो, गँवारो की भासा है.... तभी तो अपने बोलचाल में ... दो चार अंग्रेजी के शब्दो, वाक्यों का उपयोग करते हैं।

ठीक अइसन हेच स्थिति आज हमर मातृभासा छत्तीसगढ़ी के संग हे। बढ़का-बढ़का भासाविद मन कथे। छत्तीसगढ़ी भासा नई होय, वोहर मात्र एक बोली ये अउ वोला भासा के दरजा पाये बर अभी काफी लम्बा चले बर लागही। बोली, विभासा, भासा के पद सोपान अईसन सडयंत्रकारी भासाविद मन के कल्पना प्रसूत उपज । भासा माने बोलना, जेकर सो मनखे अपन वाणी से काम चलाथे वोहर भासा आय चाहे प्राच्य सारत्रीय भासा संस्कृति हो के लेटिन, ग्रीक गोधिक के आन कुछू होय । आज छत्तीसगढ़ी ला राज्याश्रय के संगे-संग वोकर अपन बोलईया मनखे मन के सेता कि जरूरत हे तभे हमर छत्तीसगढ़ी अस्मिता के सबले निक्ता हमार मातृभासा के विकास हो ही ।

छत्तीसगढ़ी ला राजभासा के दरजा दिये बर लागही, चाहे आज हो के काल। तत्कालीन सत्ताधीस मन के बुध्दिमानी एई में हे कि ये जस ला अपन माथा मा ले लें अऊ अवईया छत्तीसगढ़ी दिवस ल ये ला राजभासा के दरजा देय बर प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित करें।

छत्तीसगढ़ी के राजभासा बने मा कछु विसेस अवरोध नईये। सिरिफ कमी हवे त हमार राजनैतिक इच्छासक्ति के कमी। ये बात के खातिर ओढर करइय्या मन कई ठन कारन गनवाथे।

1. बरोबर एकसार ढांचा के कमी
2. वियाकरन अउ छंदसास्त्र के कमी
3. ठेठ अउ देसज सब्द मन के प्रति घोर आग्रह
4. सब्द भंडार के कमी
5. रास्ट्र भासा हिन्दी के संग टकराव
6. विपुल साहित्य के कमी

आज छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया के नारा तो सब्बो लगावत हें फेर येइच जघा म जनमे आन प्रात ले आये मनखे मन के संतान मन अपन आप ला छत्तीसगढ़िया कहे के जघा मा पंजाबी, गुजराती, बंगाली कहिथें अउ छत्तीसगढ़िया मन के बीच मा विसिस्टीकरन चाहथें। अइसन स्थिति मा हमन थोरकुन आक्रमक बनके अपन अस्मिता, अपन चिन्हारी के सबसे नित्ता प्रतीक छत्तीसगढ़ी ला भासा के दर्जा देवाय के उदिम करना जरुरी हे।

अभी तो अतकाच करे जाय- परयोग के रूप मा सरकारी फारम मन मा छत्तीसगढ़ी ला स्थना मिलय।
सबो गाड़ी टेसन मा छत्तीसगढ़ी मा उदघोसना अनिवार्य होय।

दूरदरसन हर डीडी महानदी नइ त डीड चित्रोत्पला नाम के चैनल छत्तीसगढ़ी मा सुरु करय
छत्तीसगढ़ी मा एक ठिन दैनिक अखबार सुरु होवय ताकि छत्तीसगढ़ी खाली विस्वविद्यालय के विसय झन के रहि जाय।
जम्मो लालित्यपूर्ण नेवता मन ला छत्तीसगढ़ी मा छपवाय के कोसिस करे जाय।

- देवरघटा (डभरा) जिला-जांजगीर चांपा

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