छत्तीसगढ़ी राजभाषा मंच के प्रवक्ता श्री नंदकिशोर शुक्ला ने कहा कि कोई भी राज्य या सरकार ज्यादा दिनों तक जन भावनाओं को दबा नहीं सकती। छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा बनाना पड़ेगा।
श्री शुक्ल ने कहा कि शासन द्वारा अध्यादेश लाने और जनभाषा को राजभाषा बनाने तक छत्तीसगढ़ियों को जागृत रहकर छत्तीसगढ़ी विरोधियों को चिन्हित कर बाहर खदेड़ने का काम छत्तीसगढ़ी संस्था, संगठन और समाज को करना होगा। श्री शुक्ल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कुछ राजनेता और नौकरशाह मिलकर छत्तीसगढ़ी भाषा औ अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिससे लोगों में आक्रोश है और सड़क पर आकर आंदोलन करने का आह्वान किया है।
बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री शशि कोन्हेर ने कहा कि हरेली के दिन ही छत्तीसगढ़ राज्य बनाने का प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा में रखा गया था और 7 वर्ष बाद छत्तीसगढ़ी जनभाषा को राजभाषा का दर्जा देने के लिए धरना प्रदर्शन, जन आंदोलन करना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ी के बिना छत्तीसगढ़ राज्य का विकास संभव नहीं है। कर्मचारी नेता श्री एसएन साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा की बात नहीं है छत्तीसगढ़ी अस्मिता को गांव गांव तक अलख जगाने की बात कही। कर्मचारी संघ के शिव शर्मा ने छत्तीसगढ़ी जनता, जनप्रतिनिधि और सरकार- जनभाषा को राजभाषा बनाने राजी है।
कुछ कर्मचारी अधिकारी छत्तीसगढ़ी भाषा के विरोधी हैं उसे राज्य से बार खदेड़ना पड़ेगा। वयोवृध्द सामाजिक नेता हिदायत अली ने कहा आज नहीं तो कल छत्तीसगढ़ी को राजभाषा बनाना पड़ेगा। अभियंता बुधराम यादव ने छत्तीसगढ़ी गीत सुमता म करबो विचार भटके भुलाए ल रस्ता बताबो धरम के दियना ल बारबो और अपन भाषा ल राजभाषा बनाबों प्रस्तुत किया।
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