फलों में 85% से 95% जल होता है, जो शत प्रतिशत विशुध्द होता है । फलों में खनिज लवण, विटामिन, व क्षार होते है । अत: फलों के उपयोग से रोग जो कि अम्ल विष के परिणाम होते है, दूर हो जाते है । शरीर में क्षार बढ़ने से फुफ्फुस, गुर्दो व जिगर की मेहनत कम हो जाती है । फलस्वरूप ये अंग शक्तिशाली बन जाते है । दमा, पुराना ब्रंकाइटिस, पुराना जुकाम, यकृत व गुर्दो के रोगों में फलाहार से असाधारण लाभ होता है ।
फलों की खटाई और उनके क्षार में रोगाणुओं को नाश करने की अनुपम शक्ति होती है । मुंह, जीभ दांत व शरीर का पाचन तंत्र, उसका रक्त तथा समस्त शरीर ही विकार रहित व निर्मल बन जाता है ।
फलों की खटाई अम्लता से उत्पन्न रोगों में जैसे वात, गठिया, पथरी में विशेष रूप से दवा व पथ्य दोनों का काम करती है क्योंकि यह खट्टी होते हुये भी पाचन के अंत में क्षार के रूप में बदलकर गुण कारक बन रोगी के लिये दवा और पथ्य दोनों का काम करती है व अचार चटनी की खटाई विष का काम करती है । नीबू आदि खट्टे फल ज्वर में देह की ज्वाला दूर करने तथा शरीर के विष निकालने में अद्वितीय है ।
चार खटाइयाँ फलों में पाई जाती है :
1.. टैनिक एसिड - कच्चे और हरे फलों में पाया जाता है ।
2.. टारटरिक एसिड - इमली और अंगूर आदि फलों में पाया जाता है ।
3.. साइटि_क एसिड - संतरा व नीबू जाति के फलों में पाया जाता है ।
4.. फोलिक एसिड - सेब और नाशपाती फलों में पाया जाता है ।
फलों में प्रोटीन का अंश बहुत कम होता है, इसलिये उन्हें आमाशय में पचने के लिये बहुत कम समय ठहरना पड़ता है । फलों के स्फोक आंतों को साफ करने में रेचक दवाइयों का काम करते है ।
फलों से रक्त शुध्द और निर्मल होकर शरीर की सुंदरता और गठन को उभारता और उसमें निखार पैदा करता है, प्रसव में आसानी होती है ।
लाभ –
1.. फलों से जीवनी शक्ति बलवती होती है ।
2.. दीर्घ जीवन की प्राप्ति होती है ।
3.. बुढ़ापा जल्दी नहीं आता ।
4.. मस्तिष्क बलशाली बनता है ।
5.. रोगों से छुटकारा मिल जाता है ।
फलाहार के बल पर ही ॠषि दीर्घ जीवन प्राप्त कर आसाधारण कार्य कर दिखाते थे ।
सूखे मेवे का साथ फलाहार या शाकाहार श्रेष्ठ है, सूखे मेंवे अलग से खाने से कब्जियत व भोजन के अंत में खाने से ठीक से पाचन नहीं होता ।
सदैव ध्यान रखें
डिब्बे पैक फलों एवं फलों के रस से बचें :
ताजे फलों एवं सब्जियों के स्थान पर डिब्बे बंद फल, सब्जी तथा फलों का रस भूलकर भी उपयोग में न लें । यदि इस रसायन को कुत्ता भी दो ग्राम के लगभग खा ले तो तत्काल मृत्यु को प्राप्त हो जाता है । बाजार में बिकते ताजे फलों के रस वास्तव में चीनी, सैक्रीन और कृत्रिम रंग और कृत्रिम सुगंध के मिश्रण मात्र होते हैं जो आपके दाँतों और ऍंतड़ियों को हानि पहुंचाकर अंत में कैंसर को जन्म देते हैं । बंद डिब्बों के मटर को हरे और ताजे रखने के लिए उनमें मैग्नेशियम क्लोराइड डाला जाता है । मक्के के दानों को ताजा रखने के लिए सल्फर डायोक्साइड नामक विषैला रसायन (कैमीकल) डाला जाता है । एरीथ्रोसिन नामक रसायन कॉकटेल में प्रयुक्त होता है । टमाटर के रस में नाइट्रेटस डाला जाता है । शाकभाजी के डिब्बों को बंद करते समय जो नमक डाला जाता है वह साधारण नमक से45 ङ्घह्न गुना अधिक हानिकारक होता है ।
इसलिए अपने और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और मेहमान-नवाजी के फैशन के लिए भी ऐसे बंद डिब्बों की शाकभाजी का उपयोग करके स्वास्थ्य को स्थायी जोखिम में न डाले ।
भोजन के तुरंत बाद फल न खाकर भोजन के 1 घंटा पहले खाना चाहिये । फलाहार स्नायु व चर्म रोगीयों के लिये हितकर है ।
फलों के द्वारा चिकित्सा –
1.. अंगूर व संतरे का रस - गुर्दे व यकृत की बीमारियों के लिये
2.. नारंगी का रस - कमर दर्द के लिये
3.. अंगूर व अनार का रस - ज्वर में
4.. गाजर, टमाटर व नीबू का रस - खून की कमी में
5.. किशमिश, खजूर, छुहारा, मुन्नक्का, टमाटर - रक्त निर्माण में
6.. सीताफल - गठिया रोग में
7.. टमाटर - बहुमूत्र व सूखा रोग में
8.. गाजर - रक्तविकार से उत्पन्न सभी चर्म रोगों की एक मात्र औषधि
9.. किशमिश - यकृत विकार व कब्ज में
10.. आम- खरबूजा - दुबले को मोटा करने वाला
11.. संतरा नीबू - दांत में चूने की कमी दूर करता है
12. नीबू का रस - चेहरे के मुहाँसे दूर होते है
13.. अन्नानास व नीबू का रस - टांसिल बढ़ने पर
पीलिया : अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्बी । अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किशमिस का पानी ले । गन्ने को चूसकर उसका रस पियें ।
मुख पर पिम्पल का दाग : गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस ।
संधिवात : लहसुन, अदर, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ के ज्वारे ।
कैंसर : गेहूँ के ज्वारे, गाजर और अंगूर का रस ।
सुन्दर बनने के लिए : सुबह - दोपहर नारियल का पानी या बबूल का रस लें । नारियल के पानी से चेहरा साफ करें ।
फोड़े फुन्सियाँ : गाजर, पालक और पाइनेपल का रस ।70 प्रतिशत गाजर के रस के साथ अन्य रस समप्रमाण । चुकन्दर, नारियल, ककड़ी, गोभी के रस का मिश्रण भी उपयोगी है ।
अल्सर : अंगूर, गाजर, गोभी का रस । केवल दुग्धाहार पर रहना लाभदायक है ।
सर्दी-कफ : मूली, अदरक, लहसुन, तुलसी, गाजर का रस, मूंग अथवा भाजी का सूप ।
ब्रोन्काइटिस : पपीता, गाजर, अदरक, तुलसी, पाइनेपल का रस, मूँग का सूप ।
स्टार्चवाली खुराक वर्जित ।
दांत निकलते बच्चे के लिए : पाइनेपल का रस, थोड़ा नींबू पानी में डालकर रोज चार औंस (100-125 ग्राम) ।
रक्तवृध्दि के लिए : मोसम्बी, अंगूर, पालक, टमाटर, चुकन्दर, सेव, रसभरी का रस दोपहर को लें एवं आधे घंटे आगे पीछे कुछ न खायें । रात को भिगोया हुआ खजूर का पानी सुबह लें ।
इलायची के साथ केले भी उपयोगी हैं ।
स्त्रियों का मासिकधर्म कष्ट : अंगूर, पाईनेपल तथा रसभरी का रस ।
ऑंखों के तेज के लिए : गाजर का रस तथा हरे धनिया का रस श्रेष्ठ है ।
अनिद्रा : अंगूर और सेव का रस । पीपरामूल शहद के साथ ।
वजन बढ़ाने के लिए : पालक, गाजर, चुकन्दर, नारियल और गोभी के रस का मिश्रण, दूध, दही, सूखा मेवा, अंगूर और सेवों का रस ।
डायबिटीज : गोभी, गाजर, नारियल, करेला और पालक का रस ।
पथरी : पत्तोंवाली भाजी न लें । ककड़ी का रस श्रेष्ठ है । सेव अथवा गाजर या कद्दू का रस भी सहायक है । जौ का सूप भी लाभदायक है ।
सिरदर्द : ककड़ी, चुकन्दर, गाजर, गोभी और नारियल के जूस का मिश्रण ।
किडनी का दर्द : गाजर, पालक, ककड़ी, अदरक और नारियल का जूस ।
फ्लू : अदरक, तुलसी, गाजर का रस ।
वजन घटाने के लिए : पाइनेपल, गोभी, तरबूज का रस, नींबू का रस ।
पायरिया : गेहूँ के ज्वारे, गाजर, नारियल, ककड़ी, पालक और बथुआ की भाजी का रस पीयें ।
कच्चा अधिक खायें ।
बवासीर : मूली का रस, अदरक का रस लें ।
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