छत्तीसगढ़ी राजभाषा मंच ने निकाली रैली - लखनलाल विश्वकर्मा

छत्तीसगढ़ी राजभाषा मंच द्वारा छत्तीसगढ़ी को राजभाषा बनाने के प्रचार-प्रसार एवं जन समर्थन के उद्देश्य से वाहन रैली एवं नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया।

वाहन रैली का शुभारंभ डॉ. पालेश्वर शर्मा द्वारा महात्मा गांधी को माल्यार्पण से किया। यह रैली गांधी पुतला चौक से प्रारंभ होकर जूना बिलासपुर, गोलबाजार चौक, देवकीनंदन चौक नेहरू चौक, महामाया चौक, सुभाष चौक तथा रतनपुर तक निकाली गई। नुक्कड़ सभा पाम्पलेट वितरण किया गया।

इस अवसर पर डॉ. पालेश्वर शर्मा ने छत्तीसगढ़ी को राजभाषा बनाने हेतु शीघ्र अध्यादेश जारी करने की मांग की छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ वासियों के लिए अस्मिता की पहचान है। इसे राजभाषा का दर्जा मिलना ही चाहिए।

यह हमारा अधिकार है हमें अपने अधिकार के लिए सड़क की लड़ाई लड़नी पड़ रही हैं। श्री नन्दकिशोर तिवारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ी को राजभाषा बनाने में विधानसभा को कोई दिक्कत नहीं होना चाहिए। इसके लिए दो-दो बार सर्व सम्मति से संकल्प पारित किया जा चुका है।

गोल बाजार में हुए नुक्कड़ सभा में सैय्यद जफर अली, प्रियनाथ तिवारी शिवा मिश्रा, अभय नारायण राय, विशंभर गुलहरे, अटल श्रीवास्तव, बसंत शर्मा, विजय तिवारी, शिव शर्मा, चन्द्रप्रकाश बाजपेयी, संतोष तिवारी ने अपना पूर्ण समर्थन देते हुए शीघ्र अध्यादेश जारी करने की मांग की। देवकीनंदन दीक्षित चौक, नेहरू चौक एवं सुभाष चौक में, प्रेमशंकर पाटनवार, दिजेन्द्र पाटनवार, सिकंदर बादशाह, एमडी मानिकपुरी, एमपी जांगड़े शेवाल चन्दा, महेन्द्र दुबे, अखिल पाण्डेय, विवेक तिवारी, बाली यदु, गणेशदत्त मेरसा, शिव शर्मा, चेतनदास बघेल, सत्येद्र शर्मा, जेपी वर्मा, प्रदीप शर्मा, जवाहरलाल रजक, सुखनंदन कुलमित्र, कृष्णा सिंह ठाकुर, डॉ. वीपी सोनी, प्रमोद पाटनवार, रामकृष्ण पटेल, सिध्देश्वर पाटनवार, जेएस परिहार, अनिल गौरहा ने संबोधित किया । इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति, विजय तिवारी, दिनेश्वर जाधव हरवंश शुक्ल, बुधराम यादव, एमी मानिकपुरी, एमपी जांगड़े ने की। कार्यक्रम का संचालन हरवंश शुक्ल ने किया एवं आभार मंच के साहित्यकार प्रकोष्ठ के संयोजक राघवेन्द्र दुबे ने किया । वाहन रैली का समापन मां महामाया मंदिर रतनपुर में किया गया।

छत्तीसगढ़ महतारी बंदना

छत्तीसगढ़ महतारी के मैं करौं बंदना
सरधा के दीया भगती के बाती
आरती उतारौं करौं पूजा अरचना।
1. गोड़ असन तोर हावय बस्तर, मुड़ असन हे सरगुजा।
दुरूग पेट हे, रायपुर छाती, बिलासपुर-रायगढ़ भुजा॥
कनिहा असन तोर नांदगांव हावय
ठुमुक ठुमुट तंय रेंगे रेंगना॥
2. कोइलारी तोर करिया चुंदी, ऑंखी दूनो कोरबा के बिजली।
रउल हावय जइसे नरी के तिलरी, गिलट कारखाना माथा के टिकली॥
भिलाई के लोहा कारखाना अइसे लागय
जइसे तोर हाथ मं सोहे कंगना॥
3. सोनहा लुगहरा ऍंचरा हरियर, लहर-लहर लहरावत हे ओ।
तोर गोदी में खेले ल दाई, मन अबड़ ललचावत हे ओ॥
सात सपूत संग मोर महतारी,
छोटे-छोटे नाती खेलय तोर अंगना॥
4. महासमुन्द, धमतरी, कांकेर, दंतेवाड़ा अउ कोरिया।
जांजगीर, कोरबा, कवर्धा, जशपुर, मया-पिरीत के हे सोरिहा॥
बीजापुर अउ नारायणपुर गा,
ऍंचरा के छोर बंधाये बंधना॥

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