 |
राजनीतिक बिहान के आजो अगोरा...
हमर देस ल सुतंत्र होय तीन कोरी अकन बछर होगे हवय । फेर छत्तीसगढ़ के भुइयां म आजो राजनीतिक बिहान के अगोरा होवत हवय । हमर पुरखा मन ये राजनीतिक बिहान के आसरा म भासा अउ संस्कृति के मापदण्ड ल लेके नवा राज के जोम मढ़ाइन अउ वोला साकार करे खातिर आन्दोलन के अलकर रद्दा म रेंगिन घलो । एकर परिणाम एक नवम्बर सन् दू हजार के देखब म घलो आइस जब ए माटी ल अलग राज के दरजा मिलिस । लोगन उत्सव-मंगल मनाइन, बड़े-बड़े जलसा करिन । फेर राज बने के आठवां स्थापना दिवस मनावत आज अइसे जनावत हे के पुरखा मन के जेन मूल उद्देस्य रिहिसे तेन आजो सुफल नइ हो पाए हे ।
भौगोलिक दृस्टि ले छत्तीसगढ़ ल एक नवा नक्सा के चिन्हारी मिलगे । फेर जेन असल उद्देस्य रिहिसे के इहां के सियानी ल इहां के मूल निवासी मन करयं, तेन आजो सपना बरोबर लागत हे । काबर ते आजोच जेन बाहिरी मनखे मन के नेतृत्व ले मुक्ति खातिर राज आन्दोलन चलाए गे रिहिस हे तेन तो अभो अभी रचत हे । आजो छत्तीसगढ़ के शासन-प्रसासन उही मनखे मन के हाथ म हे, जिंकर ले मुक्ति खातिर आन्दोलन के नेंव रखे गे रिहिसे ।
कतकों मनखे ये बात ल उजबक कहि सकथें काबर ते आज जेन छत्तीसगढ़िया के परिभासा दिए जाथे वो हर राजनीतिक सुवारथ प्रेरित होथे अउ इहां के जम्मो बासिंदा मनला छत्तीसगढ़िया के आवरन म ढांक देथे । फेर असल छत्तीसगढ़िया सिरिफ उही मन आयं जेन छत्तीसगढ़ के तइहा-तइहा ले चले आवत बोली-भासा अउ संस्कृति म रचे-बसे हे । काबर ते कोनो भी लोगन के असल पहिचान ओकर भाखा अउ संस्कृति के माध्यम ले ही होथे । जइसे हमर देस ले आने देस म गये लोगन ल अमेरिकी, रूसी, चीनी नइ माने जा सकय वइसने, पंजाबी, गुजराती, बिहारी, बंगाली भाखा-संस्कृति म रचे-बसे मनखे मनला घलोक छत्तीसगढ़िया नइ माने जा सकय भले वोहर कतकों पीढ़ी ले इहां राहत हो । हमर दृस्टिकोण म तो उहू मन छत्तीसगढ़िया नोहय जे मन इहां के मूल वंसज तो आये फेर कोनो कारन ले धरम परिवर्तन करके इहां के भाखा-संस्कृति ल बिसार के आने देस के भाखा-संस्कृति म रच-बस गे हवयं ।
कतकों मनखे पूरा भारत के संस्कृति ल एक कहिके छत्तीसगढ़ के भाखा-संस्कृति के अस्तीत्व ल नकारे के कोसिस करथें, फेर ये बात सही नोहय । जइसे हमर भाखा छत्तीसगढ़ी ह हर दृष्टि ले सुतंत्र अउ सम्पूर्न भाखा आय वइसने हमर संस्कृति घलोक हर दृष्टि ले सुतंत्र अउ सम्पूर्ण संस्कृति आय । हमन एला एक सम्पूर्ण आध्यात्मिक पध्दति वाला संस्कृति घलोक कहिथन ।
Next Page |
 |