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गोरिया देस म करिया राजा : ओबामा
- जय प्रकाश शर्मा
नाम हवे बराक हुसेन ओबामा रास्ट्रीयता अमेरिका व्यवसाय संयुक्त राज्य अमेरिका के रास्ट्रपति। पुरखा मन जेला दिन के सपना मानत रहिन हें वो ह आज होगे। जगजाहिर हे कि अमेरिका के हालत बने नई ए। सब्बो बड़े-बड़े बैंक ह डूबत हे। सब ले अमीर देस कहात लागय वो ह गरीब असन होगे। फेर इतिहास के कलम ह 4 नवंबर 2008 के रात दुनिया के सबले बड़े बलवान देस के भाग्य ला मात्र तीन शब्द 'यस वी फैन' (हाँ मैं कर सकत हँव) में लिख दीस। जब कोनों देस म लोगन मन ला सुग्घर-सुग्घर सपना देखाए बर छल-कपट ले भरे मीठ-मीठ गोठियाथे तब हम मन कइथन कि क्रांति होवत हवें।
अमेरिका एक ऐसे क्रांति के दौर ले गुजरत हे कि वोह अपन नस्लीय पुरखा के गोठ बात ला भुलाके एक अद्भुत नाम अउ मिठलबरा वाले अफ्रीकी अमेरिकी मूल के वो सेतालिस बरिस मनखे के धुन में अमेरिका जम्मों मनखे चाहे गोरिया हो या करिया नाचत हे। जउन ह राजनीति के सबले पुराना वादा करके मंत्रमुग्ध कर दे हे। ये वादा बदलाव के हवे।
''डामर असन करिया'' केन्याई ददा अउ दूध असन पड़री कन्सास निवासी दाई के बेटा बराक ओबामा के 44 वें राष्ट्रपति के बारे म मगर कोनो बिसेसन दे जा सकत हे तो ये खुद उनकर किताब ''ऑडसिटी आफ होप'' (उम्मीद की गुस्ताखी) के सीरसक ले लिए जा सकत हे अउ उनकर जीत के बाद जब उनकर दो लाख ले जादा दीवाना मन सिकागो के 'सांठ पार्क' में घंटा भर ले अपन चिंता करइया नेता के बेचैनी ले इंतजार करत ऑंखी ला गड़ा दे रहीन। तब ओबामा आ के अपन जीत के भासन म कहिस '' अगर कोनो मनखे ला अब भी ये बात म कोनो संदेह होही तव अमेरिका अइसन जगा हे जिहां सब कुछ संभव हो सकत हे कि हमर देस के महापुरुस मन के सपना हमर जमाना म घलो जिंदा हे कि नईं? जउन लोकतंत्र के ताकत म सवाल खड़ा कर देथे वोला आज रतिहा म हमर जवाब मिलगे होही। अउ ये ह मार्टिन लूथर किंग जुनियर नाँव के तेज तर्रार करिया उपदेसक के बड़े भाषन के घलो जवाब आय जउन चार दशक पहली वाशिंगटन डी सी के लिंकन मेमोरियल म दे अपन उद्गार भाषन म कहे रहिस ''ए मोर सपना आए कि एक दिन म देस उठके खड़ा होही'' अउ अपन सिध्दांत ला चरितार्थ करही। हमन खुद ये सच्चाई ला मनथन कि ''जन्म ले जम्मो मनखे बरोबर हवे। मोर सपना हे कि एक दिन जॉजिया के लाल पहाड़ मन म पहिली के गुलाम अउ पहिली गुलाम मन के मालिक मन के बेटा मन एक संग भाईचारा के टेबुल म बइठे लाइक होगे।''
चार नवंबर (11-4) वो एक दिन के रूप म मिथक बन जाही। वोला अमेरिका के भाईचारा के दिन के रूप म सुरता करे जाही। ओबामा के विरुध्द म जॉन नेता चुनाव लड़िस। रिपब्लिकन पार्टी के जॉन माकेल ल सब्बो झन जानथे ओकर परचार-परसार अब्बड़ खराप रहिस। जॉन माकेल अपना गरिमापूरन धन्यवाद भासन म कहिन कि ''आज के अमेरिका ह पहिली के अमेरिका ले बिलकुल अलग हे। आज अमेरिका सांत, दयालु, सरल अउ सहज हे। ''
ओबामा अपन सब्बो भासन म एक अमेरिका वाला अपन नारा ला बुलंद करीस।
1964 के बाद ओ ह पहिली नेता आए जउन ह आधा ले जादा (52 फीसदी) रास्ट्रीय वोट ला सकेल के रास्ट्रपति चुनाव जीते हवय। 1964 म लिंडन जॉनसन अइसने चुनाव जीते रहीस। ओबामा के जीत के अंतर म ये जाहिर होथे कि एकता बनाए रखे बर ओकर भासन ले अमेरिका मोहभंग के ए दौर म अच्छा खासा परभाव पड़ीस। ओबामा के वाम-उदारवादी सम्मोहन ले मुग्ध होवइया अमेरिका हतास के कगार म खड़े अलग-थलग परे महाशक्ति नजर आवत रहिस हे।
बाजार म अब कोनो अफवाह नईं रइगे हवे कि आर्थिक मंदी के समय अवइया हे। अमेरिका ला तुरते अउ दीर्घकालिक हल के कई बरिस ले तलास हे, या फिर आजाद दुनिया के अगले नेता ले भविस्य के उम्मीद हवे। वो बिदेस म ए महँगा लड़ाई में ओरझ गे हे। अफगानिस्तान के लड़ाई द्वितीय बिस्व युध्द ले भी लंबा खिंचागे हवे अउ मेमोपोटामिया के दलदल म ओहर आज तक 3,000 से जादा जवान मन के जान गँवा डारे हे। अमेरिका अपन खुदे घाव देके लहू बहावत हे। वो ह नवाँ-रूढ़िवादी योजना से मुक्ति पाए के परयास करत रहिस हे। वो ह जॉर्ज बुश उपर जनमत इक्टठा करे बर तैयार रहिस। वइसे भी बुश संभवत: सबले अलोकप्रिय अमेरिकी नेता के रूप में ओवल आफिस ले बिदा होही। अमेरिका ला मरहम लगाने वाला भारी भरकम नेता के जरूरत रहिस।
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