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संपादकः आसिफ इकबाल
मानसेवी सलाहकारः डॉ. सुधीर शर्मा
छत्‍तीसगढ़ - छत्‍तीसगढ़ी अउ अब छत्‍तीसगढ़ी राजभाषा
 

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मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना में न किसी जात-पात का भेद है, न किसी वर्ग का और न ही किसी सम्प्रदाय या पंथ का । यह वास्तव में ही रमन सरकार का जनता को एक ही नजर से समान रूप में  देखने का अपना एक विशेष दृष्टिकोण है जो डॉ. रमनसिंह को एक ऐतिहासिक पुरूष प्रमाणित करता है। इस एक अनूठी पहल का जो उदाहरण उन्होंने देश के समक्ष प्रस्तुत किया है वह वास्तव में ही सराहनीय है तथा अन्य राज्यों के लिये अनुकरणीय भी है ।

गरीबों के निवाले का सुरक्षा-कवच

एक इतिहास रचती मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना और उसका सच

- हरि प्रकाश वत्स

अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति को राहत पहुंचाना यह सफल सूत्र एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय का था जिसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह ने एक संकल्प के रूप में लेकर उसे मूर्तरूप देने का जो उपक्रम किया है उसका नाम है 'मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना' जो खाद्यान्न सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक निर्णय कहा जा सकता है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य की लगभग45 ङ्घह्न प्रतिशत गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी को एक मई2007 ङ्ख_ से केवल तीन रूपये तथा सवा छ: रूपये प्रतिकिलो की दर से35 ङ्गह्न किलो तक चांवल का प्रदाय करना था । दिसम्बर2007 ङ्ख_ तक14 ङ्कङ्घ हजार परिवारों को सवा छङ रूपये प्रतिकिलो की दर से चावल प्रदाय किया गया तथा21 ङ्खङ्क हजार परिवारों को नि:शुल्क चावल दिया गया । इस तरह35 ङ्गह्न लाख से अधिक परिवार इस योजना से लाभान्वित हुये जिनमें वे परिवार भी शामिल हैं जो बी.पी.एल. सर्वे की सूची से छूट गये थे तथा केंद्र सरकार के मापदंड के कारण इस सुविधा राज्य के सभी35 ङ्गह्न लाख से अधिक बी.पी.एल. परिवारों को तीन रूपये प्रति किलो की दर से चावल प्रदाय करने का राहती निर्णय सरकार द्वारा लिया गया जिसे चाउर तिहार के रूप में16 जनवरी2008 ङ्खख़  से लागू किया गया।

खाद्यान्न सुरक्षा के अंतर्गत दो हजार से अधिक दूरस्थ गांवों में ग्रेन बैंक, प्रत्येक पंचायत में हर समय नि:शुल्क वितरण के लिये एक क्विंटल चावल उपलब्ध कराया गया तथा सभी बी.पी.एल. परिवारों को25 ्न पैसे प्रति किलो की दर से छत्तीसगढ़ अमृत नमक, अन्नपूर्णा दाल भात केंद्रों का संचालन जनभागीदारी से करते हुये पांच रूपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था178 केंद्रों द्वारा जिनके संचालन से35हजार से अधिक लोग लाभान्वित हुये ।

'गरीब और भूख की कोई जात नहीं होती ' डा. रमन सिंह का यह कथन उनकी उस मानवीय सम्वेदना के विस्तार का परिचायक है जिसे उन्होंने एक राज्य का मुखिया होने के नाते गरीबों की भूख से निकले आंसुओं तथा वंचितों की कराहों के दर्द महसूस किया। उनकी इसी मानवीय सम्वेदना ने उनके नीति निर्धारण को भी एक सकारात्मक दिशा प्रदान की । यूं तो गरीबी हटाओ के खोखले नारे गत साठवर्षों से देश के कोने -कोने में सुनाई दिये किन्तु फिर भी गरीबी नहीं हटी लेकिन छत्तीसगढ़ प्रदेश में गरीबों के पेट की आग बुझाने का जो सफल प्रयास राज्य सरकार ने तीन रूपये प्रति किलो की दर पर गरीब परिवारों को चावल उपलब्ध कराने हेतु किया उसे इतिहास का स्वर्णिम उपक्रम कहना अतिश्योक्ति न होगी। यहां यहउल्लेख ृल्लउद्य करना भी समीचीन होगा कि विपक्ष यह दावा कर रहा है कि यदि राज्य में उसकी सरकार बनी तो गरीबों को दो रूपये प्रतिकिलो की दर से चावल दिया जायेगा। ऐसा दावा करने से भला विपक्ष को कौन रोक सकता है यह उसका हक भी है लेकिन केंद्र में जब से संप्रग सरकारआई है तब से आज तक केंद्र की तरफ से ऐसी कोई भी पहल की गई हो ऐसा देखा नहीं गया वरन उल्टे केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य को मिलने वाले चावल के कोटे में कटौती अवश्य कर दी । देश की सबसे बड़ी खाद्यान्न योजना का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राज्य में16 जनवरी2008 को प्रदेश के15 जिला मुख्यालयों में एक साथ चावल महोत्सव के रूप में किया गया जिसमें भाजपा के राष्टीय अध्यक्ष, पूर्व मंत्री, तथा भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ शामिल हुये तथा सभी ने अलग-अलग जिलों के मुख्यालय में इस योजना का शुभारंभ करते हये चावल वितरण के कार्य को सम्पन्न किया। इस पुनीत कार्य के लिये सत्तासीन डा. रमनसिंह की सरकार बधाई की सुपात्र है जिसने गरीब तथा मेहनतकशों के पसीने को यथोचित सम्मान दिया। उन्हें105 रू. में35 कि.ग्रा. चावल देकर गरीबों का पेट भर दिया तथा उन्हें राज्य से पलायन करने की मजबूरी से निजात दिलाई इस योजना से राज्य की60 प्रतिशत आबादी यानि34 लाख परिवारों का पेट भरेगा जिससे न तो कोई भूखा ही सोयेगा और न ही पलायन करेगा। मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना में न किसी जात-पात का भेद है, न किसी वर्ग का और न ही किसी सम्प्रदाय या पंथ का । यह वास्तव में ही रमन सरकार का जनता को एक ही नजर से समान रूप में  देखने का अपना एक विशेष दृष्टिकोण है जो डॉ. रमनसिंह को एक ऐतिहास पुरूष प्रमाणित करता है। इसएक अनूठी पहल का जो उदाहरण उन्होंने देश के समक्ष प्रस्तुत किया है वह वास्तव में ही सराहनीय है तथा अन्य राज्यों के लिये अनुकरणीय भी है । इस योजना से राज्य की65 ङ्ढह्न प्रतिशत आबादी को सस्ते दाम पर अनाज प्रदान कर उसकी चिन्ता को दूर कर दिया गया जिससे अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति को राहत मिली है और पं. दीन दयाल उपाध्याय का सपना साकार हो पाया है ।
योजना पर उठते सवाल : मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के क्रियान्वयन को लेकर बहुत से सवाल उठाये जा रहे थे जिसमें अधिकतर लोग इतनी बड़ी योजना के लिये पैसा कहां से आयेगा? जैसे सवाल अक्सर उठाते रहे हैं। इस विषय में विपक्ष भी पीछे नहीं था उसका कहना था कि इस योजना के क्रियान्वन में राज्य का केवल10प्रतिशत ही अंशदान है। इन सभी प्रश्नों का एक साथ उत्तर देकर मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेशभर में गरीबों को चावल वितरण की योजना राज्य के बजट से ही संचालित की जायेगी जिसमें राज्य के34 लाख गरीब परिवारों को तीन रूपये प्रति किलो चावल देने पर कुल837 करोड़ रूपये खर्च होंगे। इस योजना में वर्ष2007 के ग्रामीण बी.पी.एल. में सम्मिलित सभी परिवार शामिल हैं । इसके अतिरिक्त सन1991 तथा1997 के सर्वे में सम्मिलित लोगों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है।

इसके साथ ही दिसम्बर2007 तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत14.32 लाख सामान्य वर्ग के गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को 6.25 रूपये किलो की दर से चावल उपलब्ध कराया जाता था जबकि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों को तीन रूपये प्रति किलो की दर से। मु.खा.स. योजना से अब यह भेद समाप्त हो गया है । अब सभी गरीबों के परिवारों को इस योजना के अंतर्गत बंद पैकेटों में चावल दिये जा रहे हैं तथा चावल की गुणवत्ता एवं वजन को बरकरार रखने के उद्देश्य से इसमें पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है । सभी गरीब34 लाख राशन कार्डधारियों का डाटाबेस भी तैयार करके विभागीय वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा यह भी जानकारी दी गई कि नागरिक आपूर्ति निगम के प्रदाय केंद्रों से उचित मूल्य की दुकानों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली हेतु की गई व्यवस्था की राशन सामग्री का परिवहन करने वाले वाहनों में जी.पी.एस. उपकरण लगाये गये हैं जो सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में सहायता होते हैं ।
आज के इस कठिन समय में जब कि खुले बाजार में चावल के दाम14-15 रूपये प्रति किलो पर पहुंच गये हैं गरीब आम आदमी को केवल तीन रूपये किलो में चावल उपलब्ध करा देना कोई आसान बात नहीं । राज्य सरकार ने अपनी वितरण प्रणाली को और भी चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिये सभी प्रशासनिक उपायों के साथ इसे हाईटेक बनाने के लिये भी प्रशासनिक उपायों के साथ इसे हाईटेक बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी । खाद्यान्न वितरण योजना की सम्पूर्ण व्यवस्था को इंटरनेट, कम्प्यूटर तथा मोबाइल से जोड़ दिया गया है जिससे गड़बड़-घोटाले की गुंजाइश कम से कम रहे । प्रदेश का शासन ऐसे लोगों के प्रति भी कम सतर्क नहीं जो गरीबों के राशन को हड़पने में माहिर है । डा. रमन सिंह ने इस विषय में ऐसे लोगों को सतर्क करते हुये साफ तौर पर चेतावनी दे दी है कि इस विषय में गड़बड़ी करने वाले लोग आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सीधे जेल जायेंगे । इसी प्रकार राशन की कालाबाजारी करने वालों को भी चेता दिया गया है । विधानसभा के अगले सत्र में इस कानून को और भी सख्त बनाने के उपाय किये जाने वाले हैं। इस विषय में यहां यहउल्लेख ृल्लउद्य करना भी जरूरी है कि सरकार के अतिरिक्त भाजपा संगठन ने भी अपने सदस्यों को चेताचित करते हुये घोषणा की है कि कोई भी सदस्य कमीशन नहीं खायेगा तथा राईस मिलों के मालिक भी कालाबाजारी से बचने का प्रयास करेंगे ताकि अनुशासनात्मक कार्यवाही की आवश्यकता न पड़े ।  राज्य शासन के अनुसार इस समय राज्य में10,300 ङ्क, ङ्ग सहकारी राशन दुकानें हैं जिनका संचालन सहकारी समितियां, ग्राम  पंचायतें तथा स्व सहायता समूह कर रहे हैं । सभी हितग्राहियों की सही जानकारी के लिये हर एक दुकान के सामने योजना के प्रचार प्रसार के लिये बोर्ड भी लगवाये गये हैं । मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के सफल संचालन के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्राय: होने वाली स्वार्थ सिध्दि हेतु गड़बड़ियां रोकने के उद्देश्य से दोषी पाये जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है । राशन में हेराफेरी अथवा कालाबाजारी करने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधान लागू किये जायेंगे । इस योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायतों के लिये नि:शुल्क टेलीफोन नं. 3663 की सुविधा भी प्रदान की गई है । इसी के साथ एस.एम.एस. के द्वारा लोगों को यह भी बताने का प्रबंध किया गया कि उनके गांव या कस्बे का चावल कब और किस रंग के वाहन से रवाना किया गया है।

 

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