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बस म बइठन अऊ घूमन
- सुधीर शर्मा
दुनिया के सबले बड़का कका-देस अमेरिका के ताम-झाम दखतच बनथे। फेर अमेरिका के बड़का सिटी न्यूयार्क ह तव दुनिया के सबले मांहगी अऊ बिजनेस के पोट्ठ जघा ए। विश्व हिन्दी सम्मेलन के अमेरिका म होना बड़े घटना ए। वहू न्यूयार्क के संयुक्त राष्ट्र संघ के बड़े हाल म।
हिंदी के गोठ फेर करबो। आज न्यूयार्क शहर के गोठ सुनन। सुनन का देखन मोर ऑंखी ले। न्यूयार्क म चारों कोती अमेरिका दिखथे। टीवी म, रेडियो म, मनखे मन के सफेट-करिया टी-शर्ट म, गिलास म, कप म। चारों कोती अमेरिका के झंडाच झंडा। अमेरिका के बात सोच म 'स्टेचू ऑफ लिबर्टी' ऑंखी-ऑंखी म झूलथे। ऍंगरोी सिनेमा अऊ टी.वी. म देख-देख के अमेरिका सपना बरोबर होगे रहिस। हमन हवाई जहाज ले हवाई अड्डा उतरेन तव देख के अकबका गेन। बड़का हवाई अड्डा तेखर दुवारी भीतरी ले रेलगाड़ी घलो चलत हे। कतेक सुरक्षा, चेकिंग, चारों कोती मनखेच मनखे।
आयोजक मन डहर ले एक ठन बस आइस, जेमा बइठेन। थोड़कुन म पानी गिरे ल धर लिस। हमर संग दे बर आय ऊँहा के भारतीय संगीत ह बताइस के इहाँ पानी गिरे म टाइम नइ लागय। मनखे मन छत्ता तेखरे सेती धर रहिथे।
चारों कोती बड़का-बड़का बिल्डिंग। छह-छह रद्दा वाले डामर के सड़क। गाड़ीच गाड़ी। कोनों दूसर दुनिया म आगेन तइसे लागत रहिस। हमर बस समुद्र के भीतरी ल जाय लगिस। बताय गिस के दू-तीन किलोमीटर समुद्र के भीतरी ल रद्दा बनाये गे, नइ त कतकोन किलोमीटर घूम के जाय ल पड़तिस। सड़क के ऊपर समुद्र हवय जान के बने लगिस। आधा घंटा में पेनसेलवेनिया आ गिस। मेट्रो कस ऊहाँ 'सब-वे' चलथे। सड़क के नीचे रेलगाड़ी। ओखरे स्टेशन पेनसेलवेनिया के आगू म हमर बस रूकिस। उतर के देखेन तव होटल पेनसेलवेनिया आगू म रहिस। बीस मंजिला सइघो बड़। अपन समान ल धरे अऊ होटल के हॉल म आयेन। कुली अऊ वेटर के काम ऊहाँ नइ राहय। हाव तव हमन ओला पइसा न दे सकन।
वो होटल नइ रहिस जइसे जम्मो पृथ्वी रहिस होय, कतकोन देस के आनी-बानी मनखे। गोरिया, करिया, छोटे-बड़े, सब लाइन म अपन कमरा बन खड़े राहय। हमू मन ऐतीओती ले पूछ-पूछा के लाइन लगेन। देस के बड़का हास्य-कवि सुरेंद्र शर्मा ल पूछ-पूछा के हमू मन अपन चिट्ठी-पतरी देखा के लाइन लगेन। कमरा नं. 907 दे गिस। 9वाँ मंजिल म। हमर संग गे संगी मन ऐती-ओती के कमरा पाइस।
जोरदार कमरा घर असन। सम्मेलन के चिंता तव रहिस फेर अमेरिका घूमे के घलो।
निकल पड़ेन दूसर दिन बिहनिया अमेरिका के न्यूयार्क घूमे बर। बस म घूमे बर सब झन के मन आगे। काबर के ओखर छत म कुरसी लगे हे तेमा बइठे-बइठे जम्मो शहर ल देख सकथन। एम्पायर स्टेट बिल्डिंग जेन दुनिया के सबले ऊँच बिल्डिंग आय, तेला देखन भीतर ले। छत ऊपर चढ़ेन, जम्मो न्यूयार्क दिखे लगिस। ऊहाँ म्यूजियम घलो हे। टाइम स्क्वेयर पहुँचेन। दुनिया के सबले बड़े व्यापारिक जघा। चारों कोती रंग-बिरंगी विज्ञापन पट्टी। सिनेमा कस परदा सड़क म लगे। लाइटे-लाइट आनी-बानी के। ए जघा हमन ल भा गे। रोज रात के 9 ले 2 बजे तक हमन एही सड़क म घूमन। सिनेमा, बार, दुकान, सब इही रोड म। रोड म चौराहा-चौराहा म भारत कस फुटपाथ म दुकान लगे रहय। सबले बड़े बात, के दुनिया के अइसे कोनो देस के आदमी नइ होही जेन इहाँ नइ दिखिस होही। हाँ, इहाँ रिक्शा घलो हे, पाइडिल वाले अऊ बेटरी वाले। बने-बने घर के लइका मन रिक्शा चलाके पर्यटक मन ल टाइम स्क्वेयर घूमाथे। एक-दू इंडियन घलो दिखिस। मन म तकलीफ होइस के ए इंडियन मन इंहों रिक्शा चलावत हें। फेर पता लगिस के ये शौकिया एं। हमन रेंगत-रेंगत घूमेन। टाइम स्क्वेयर के दरजनों विज्ञापन बोर्ड, चमचमावत कपड़ा पहिने पर्यटक, दुनिया बिसाय बर निकले हे, अइसे लागत रहिस। फुटपाथ में टी-शर्ट, सोविनियर के ठेला, पेंटिंग, फोटो बनइया, चिकन-मटन बेचइया, एक-दू नशेड़ी भिखमंगा। कोनो गा-बजा के माँगत नीग्रो। चारों कोती भीड़-भाड़।
न्यूयार्क ह रातभर जागथे। इहाँ के सड़क जागथे। जिनगी लाइट म जगमगा जथे। दुनिया रद्दा म पसर जथे। दुनिया के मंड़ई होत हे, अइसे लगथे। एक मैकडोनाल्ड के रेस्तरां म घुसेंव। बर्गर लेंव, सबो झन मिल-बाँट के खायेन। न्यूयार्क म पइसा के कोनों कीम्मत नइये। बिदेस गेन अऊ सोचन एक डालर कतका रुपया के के तव कुछू बिसा नइ सकन। डालर ल एक रुपया मान के चलबो तव सुखी रही सकथन।
हरेक माल पाँच रुपया सहीक इहाँ 99 सेंट माने एक डालर वाले दुकान हे। कुछू ले लव एक डालर म। हमर गरीबहा मन बर बने दुकान। इहाँ घर-परिवार अऊ संगी-साथी म सेखी बघारे बर दू-चार समान बिसायेन। टाइम स्कवेयर म नंबर वाले गली कस सड़क हे। एक ले 40-50 तक। इही म सब दुकान-होटल पसरे हे।
दूसर दिन हमन 'स्टेचू ऑफ लिबर्टी' जाए बर निकलेन। सब-वे रेलगाड़ी म टिकट कटा के बइठेन अऊ आठ-दस किलोमीटर जाके स्टेशन म उतरेन। ऊहाँ ल पहिली बुक्रलेन ब्रिज गेन। समुद्र ऊपर बनाये गे हे बड़का लोहा के पुल। ऐला देखे बर दुनियाभर के मनखे आथें। कतको सिनेमा के शूटिंग इहाँ होय हे। पुल ऐतिहासिक हे अऊ बताथें के उतलंगहा मनखे का नइ कर सकय। तीरे म बड़का महल कस ऐतिहासिक बिल्डिंग रहिस।
फेर घूम-घूमा के पहुँचेन लिबर्टी म। गार्डन जिहाँ पानी जहाज बड़का बोट घुमाय बर खड़े रहिस। ओमा तीर ले देख के आयेन समुद्र के बीच म मसाल धरे खड़े आजादी के देवी ल। हमर सपना साकार होगे। (आगू के गोठ फेर दूसर दिन)
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