समाज

छत्तीसगढ़ में मची है जमीन की लूट - रामेश्वर वैष्णव

छत्तीसगढ़ का हर जागरूक व्यक्ति अब महसूस कर रहा है कि राज्य बनने के बाद हर तरह की अफरा-तफरी के साथ ही यहां कीमती जमीन की लूट मची है। संस्थानों के नाम पर, कारखानों के नाम पर, होटलों मोटलों एवं सरकारी महकमों के नाम पर भूमि पुत्रों से ऐन क  read more »

छत्तीसगढ़ी भासा : उपेच्छा अऊ अपेक्छा - नन्दकिशोर तिवारी

हमर ये समय ल, जेमा हम जीयत हन जमों ला भुला जाय (स्मृति भंग) के समय कहे जा रहे हे। ए समय के मझ म बइठ के मैं सोचत हंव के भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अपन आज ल हमर काल बर सौंपे के बात कहत रहिन तउन ह छत्तीसगढ़ के तात्कालीन साहित्यकार, मन  read more »

मातृभाषा के महत्ता के कोनो जोड़ नइये - जागेश्वर प्रसाद

जउन बोली भाखा अपन महतारी के मुख ले बच्चा दूध पीयत खेलत, फूदकत लोरी कहिनी सुनथे-सीकते ओही ल मातृभासा कहे जाथे। भले आदमी कतका न भासा के जानकार विद्वान हो जाय फेर ओमन मातृभासा नइ हो सकय। भले ओमन रास्ट्रीय, अंतर्रास्ट्रीय, अंतर-प्रांत  read more »

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