साहित्‍य

छत्तीसगढ़ी भासा : उपेच्छा अऊ अपेक्छा - नन्दकिशोर तिवारी

हमर ये समय ल, जेमा हम जीयत हन जमों ला भुला जाय (स्मृति भंग) के समय कहे जा रहे हे। ए समय के मझ म बइठ के मैं सोचत हंव के भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अपन आज ल हमर काल बर सौंपे के बात कहत रहिन तउन ह छत्तीसगढ़ के तात्कालीन साहित्यकार, मन  read more »

छत्तीसगढ़ी दिवस पर भाषायी विमर्श

महासमुन्द, साहित्यकार आनंद पौराणिक के निवास पर आयोजित छत्तीसगढ़ी दिवस के भाषायी विमर्श में गत दिनों, स्थानीय छत्तीसगढ़ी रचनाकारों ने वैचारिक अभिव्यक्ति दी। छत्तीसगढ़ी के प्रतिनिधि कवि माखनलाल तम्बोली ने सर्वप्रथम मां सरस्वती क  read more »

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