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हमन सबले पहिली भारतीय होय के बाद छत्तीसगढ़िया अन । ये सोच ल हिरदे मा संजोय के बाद जब अपन छत्तीसगढ़िया चिन्हारी कोती धियान करथन तब अब्बड़ अकन निरासा हाथ लगथे । एक पईत दिल्ली प्रेस के सरिता-मुक्तामन राष्ट्रभासा हिन्दी के समर्थन मा अपन read more »
प्रत्येक भाषा बोली व्यवहार में विविधरूपी या विषमरूपी होती है। जो भाषा जितने व्यापक क्षेत्र में व्यवहत होती है उस में उतनी ही अधिक विविधता होती है, संप्रेषण की दृष्टि से जो उसकी जीवंतता का प्रमाण है। यह उल्लेखनीय है कि भाषागत यह व read more »
हमर ये समय ल, जेमा हम जीयत हन जमों ला भुला जाय (स्मृति भंग) के समय कहे जा रहे हे। ए समय के मझ म बइठ के मैं सोचत हंव के भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अपन आज ल हमर काल बर सौंपे के बात कहत रहिन तउन ह छत्तीसगढ़ के तात्कालीन साहित्यकार, मन read more »
आगामी 30 मार्च को छत्तीसगढ़ी दिवस आयोजन की क्रियान्वयन समिति की बैठक विप्र सहकारी मुद्रणालय के सभा कक्ष में दिनांक 13 मार्च 2005 को श्री रामकुमार तिवारी, एडव्होकेट, बेमेतरा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में श्री जागेश्वर प्रसाद (र read more »
रायपुर 31 मार्च, सृजन-सम्मान, वैभव प्रकाशन एवं छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर के संयुक्त तत्वाधान में छत्तीसगढ़ी दिवस के अवसर पर सम्मान, प्रमाण पत्र वितरण एवं लोकार्पण समारोह का आयोजन वैभव प्रकाशन, पुरानी बस्ती रायपुर में किया गया। मुख्य अति read more »